कथायात्रा
बलराम अग्रवाल की कथा-रचनाएँ
रविवार, अक्टूबर 25, 2026
तैरती हुई रोटियाँ / बलराम अग्रवाल
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पति निकम्मा नहीं था, लेकिन कोरोना के चलते सभी तरह के निर्माण-कार्य बन्द थे। इसलिए घर में ही पड़े रहने को विवश था। “ सुनो, ” भूख से विह...
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शनिवार, अक्टूबर 24, 2026
पेड़ पर रोटियाँ / बलराम अग्रवाल
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दस वर्षीय राजू को तीन दिन से रोटी नसीब नहीं हुई थी। वह जब भी खाना माँगता, माँ कभी प्याज तो कभी मूली उसके हाथ में थमा देती। “ यह क्या बात...
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मंगलवार, जून 17, 2025
दो भक्तों की कथा / बलराम अग्रवाल
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"सर, आज की परिस्थिति में 'भक्त' और 'अंधभक्त' में क्या अन्तर है?" "जो लोग एक खास खेमे का राग अलापते हैं, वे भक...
बात-बतंगड़ / बलराम अग्रवाल
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“वे कह रहे हैं—यह हिमाकत नाकाबिले बर्दाश्त है।” “क्यों?” “इसलिए कि… ‘आपका दिन शुभ हो’ की बजाय, गलती से ‘आपका दीन शुभ हो’ टाइप होकर समूह में...
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एक असन्तुष्ट से बातचीत / बलराम अग्रवाल
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जैसे ही कार उसके नजदीक से गुजरती, भौंकते हुए वह आदतन-सा उसके साथ दौड़ पड़ता। आखिरकार, एक दिन मैंने कार साइड में रोकी और दरवाजा खोलकर नीचे उतर ...
अन्तर्सम्बन्ध / बलराम अग्रवाल
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ललिता का सिर आज गर्वानुभूति से तना हुआ ही था। वह शायद इस इंतजार में थी कि कोई सहक...
रविवार, फ़रवरी 09, 2025
उसकी बात / बलराम अग्रवाल
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[ लघुकथा का यह ड्राफ्ट आज 09-02-25 को एक पुरानी डायरी में रखा मिला है। इस पर तारीख नहीं लिखी। कथ्य और ड्राफ्ट की प्रकृति को देखते हुए 1975 त...
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रविवार, नवंबर 10, 2024
लघुकथा की भाषिक संरचना / बलराम अग्रवाल
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यह लेख मार्च 2024 में प्रकाशित मेरी आलोचनात्मक पुस्तक 'लघुकथा का साहित्य दर्शन' में संग्रहीत लेख 'लघुकथा की भाषिक संरचना' ...
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