“वे कह रहे हैं—यह हिमाकत नाकाबिले बर्दाश्त है।”
“क्यों?”
“इसलिए कि… ‘आपका दिन शुभ हो’ की बजाय, गलती से ‘आपका दीन शुभ हो’ टाइप होकर समूह में डल गया। बस, तभी से सारे के सारे सेक्युलर अपना कुर्ता फाड़ डाल रहे हैं। बाँहें कुहनियों तक चढ़ाए, आँखें तरेड़ते खड़े हैं!”
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बेहतरीन संकेतात्मक और सबकुछात्मक - शेख़ शहज़ाद उस्मानी, शिवपुरी (मध्यप्रदेश)
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